17 दिसंबर 2020 - 12:41
    शहीद क़ासिम सुलेमानी का बेटी के नाम आख़िरी ख़त, आंखों में आ जाएंगे आंसू...

ईरान के महान योद्धा जनरल शहीद क़ासिम सुलेमानी ने अपनी शहादत से कुछ महीने पहले अपनी बेटी फ़ातेमा सुलेमानी के नाम एक ख़त लिखा था, जिसमें उन्होंन लिखा था, आह! मेरे जिगर का टुकड़ा, मेरी प्यारी, मेरी ख़ूबसूरत बेटी तुम कहां हो?

प्रतिरोध के महान योद्धा शहीद क़ासिम सुलेमानी और उनके क़रीबी साथी शहीद अबू मेहदी अल-मोहन्दिस की शहादत की वर्षगांठ के अवसर पर इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने बुधवार 16 दिसंबर 2020 को ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी और उनके क़रीबी सहयोगी तथा इराक़ की स्वयंसेवी फ़ोर्स हशुदुश्शअबी के कमांडर शहीद अबू मेहदी अल-मोहन्दिस के शहादत दिवस के कार्यक्रम के आयोजकों और शहीद सुलेमानी के परिवार वालों से मुलाक़ात की थी। इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने इस मुलाक़ात में उनके द्वारा दिए गए भाषण में शहीद क़ासिम सुलेमानी की विशेषताओं के बारे में उल्लेख किया गया था।

इस मुलाक़त में शहीद क़ासिम सुलेमानी की बेटी फ़ातेमा सुलेमानी ने उस ख़त को पढ़ा जो उनके पिता ने अपनी शहादत से कुछ महीने पहले उनके लिए लिखा था। इस ख़त में शहीद जनरल सुलेमानी ने अपने दिल की बातें लिखी थीं, जिसमें वह शहादत के दर्जे और महत्व का उल्लेख करते हुए शहादत के लिए अपनी व्याकुलता और आकांक्षा को बयान करते हैं। इस ख़त में लिखे गए एक-एक शब्द हमे सोचने पर मजबूर करता है। इस ख़त के कुछ हिस्से इस प्रकार हैः“मेरी प्यारी फ़ातेमा, यह कुछ पेज तुम्हारे लिए लिख रहा हूं, क्योंकि मुझे पता है कि तुम मुझे सच्चे दिल से चाहती हो, मुझे नहीं पता है कि क्यों इन सभी शब्दों को मैं तुम्हारे लिए लिख रहा हूं, लेकिन मैं महसूस कर रहा हूं कि अपने जीवन के इस अकेलेपन में मुझे ज़रूरत है कि मैं किसी के सामने अपने दिल की बातों को रखूं, आह! मेरे जिगर का टुकड़ा, मेरी प्यारी, मेरी ख़ूबसूरत बेटी तुम कहां हो? मैं तुम्हें देखने के लिए व्याकुल हूं, तुम्हारी एक हंसी मेरे पूरे वजूद को सकून देती है और तमाम ग़मों को हवा में उड़ा देती है, मैं कितना इस लम्हे को चाहता हूं आहः, कितना यह दृश्य ख़ूबसूरत है, कितना इस क्षण से प्यार करता हूं, प्रेम के मार्ग में प्राण न्योछावर करना बहुत ही आनंददायक है। हे मेरे ईश्वरः 30 साल मैंने इस लम्हे के लिए कोशिश की है। इस क्षण के लिए इश्क़ में आने वाली सभी रुकावटों को हमने दूर किया है, ज़ख़्मों को झेला है, उससे बहुत दुआ की है, कितना यह लम्हा ख़ूबसूरत है, मैं इस क्षण को बहुत चाहता हूं।”उल्लेखनीय है कि ईरान के महान योद्धा शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी की बेटी ज़ैनब का भी हाल ही में एक इंटर्व्यू सामने आया था जिसमें उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें बताईं थीं। उन्होंने अपने इंटर्व्यू में कहा था कि, अमरीका जनरल क़ासिम सुलेमानी को एक मांस्टर मानता था, जबकि वे अपने देश और दूसरे देशों के लोगों के लिए एक मुक्तिदाता थे। मेरे पिता ने अपनी ज़िम्मेदारी अच्छी तरह से निभाई और उन्हें क्रोधित कर दिया। आप देख ही रहे होंगे कि पश्चिमी एशिया में जो भी योजना उन्होंने बनाई, वह नाकाम हो गई। जहां भी उन्होंने घुसकर ईरान को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश की वे नाकाम रहे। इसलिए उनके लिए मेरे पिता एक मांस्टर हैं, हालांकि वे एक मुक्तिदाता थे। ज़ैनब सुलेमानी के अनुसार, जनरल सुलेमानी को शहीद करने के बाद अमरीका ने सोचा था कि अब सबकुछ रुक जाएगा, क्योंकि उन्होंने पश्चिमी एशिया की ताक़त, जनरल सुलेमानी को रास्ते से हटा दिया है, लेकिन वह ग़लत थे, उनकी सोच बहुत ग़लत थी, यह तो शुरूआत है। ग़ौरतलब है कि 3 जनवरी 2019 को बग़दाद एयरपोर्ट के नज़दीक जनरल सुलेमानी को ड्रोन हमले में शहीद कर दिया गया था। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने इस हमले का आदेश देने की बात स्वीकार की थी।